Monday, January 7, 2008

अ आ यानी...

अ आ यानी वर्णमाला सीखने की शुरुआत !

अ आ यानी भी !

अ आ यानी नसुनी वाज

अ आ यानी पना समान !

अ आ यानी भिव्यक्ति- नंद !

अ आ यानी भय - क्रोश !

अ आ यानी न्तिम दमी !

और अंततः

अ आ यानी रुण दित्य भी समझ सकते हैं !



तो शुरुआत हो चुकी है। और इस शुरुआत का श्रेय है कवि-कथाकार-फिल्मकार उदय प्रकाश को। ब्लाग पर आने को लेकर मन में कुछ उधेड़बुन थी, लेकिन उदय जी से चर्चा के बाद लगा कि अभिव्यक्ति के इस नए माध्यम की ताकत का इस्तेमाल अपनी बात लोगों तक पहुंचाने के लिए करना चाहिए। इस तरह यह अ आ अब आपके सामने है।

जल्दी ही नई पोस्ट के साथ मिलेंगे।

13 comments:

Pramod Ranjan said...

अ आ... यानी ब्‍लॉग की दुनिया में अग्रज कवि का स्‍वागत !!!

जोशिम said...

अद्भुत आरंभ भी ; स्वागत - मनीष [उदय प्रकाश जी के ब्लॉग पर आपकी प्रतिक्रिया पढ़ इतरागमन]

Sanjeet Tripathi said...

स्वागत आपका!
शुभकामनाएं!

vinod said...

gajab kar diya aapne
badhai...bade blogi hai aap
vinod purohit

अजित वडनेरकर said...

स्वागतम् स्वागतम्
जाते हुए तो नहीं मिले थे आप
पर अब इधर ही स्वागतम् स्वागतम्
छोटी सी है दुनिया , पहचाने रास्ते हैं तुम
कहीं तो मिलोगे , कभी तो मिलोगे......
बधाई नए साल के मिलन की...
अनसुनी करेंगे , तो बुरा मानेंगे

Arun Aditya said...

प्रमोद जी, मनीष जी, संजीत जी, अजित जी,विनोद जी!
आप सब का शुक्रिया। दोस्तों की प्रतिक्रिया उत्साह बढ़ाती है।
अरुण

परेश टोकेकर said...

अरूण भाई संक्रांति-ओणम की बहुत बहुत शुभकामनाए!

Arun Aditya said...

परेश आप को भी संक्रांति-ओणम की बहुत -बहुत शुभ कामनाएं।

लाल्टू said...

यार अरुण, मेरा ई-मेल पता तुम्हारे पास है, जरा मेल भेजो ताकि तुम्हारा पता मुझे मिले और ढंग से अ आ सीखें.
और मेरे चिट्ठे पर प्रतिक्रिया पर शुक्रिया.

आशीष महर्षि said...

बहुत दिमाग लगाना पड़ा इसे समझने में लेकिन एक नई शैली देखकर मन खुश हो गया

Kakesh said...

स्वागतम.

Arun Aditya said...

काकेश जी, आशीष जी धन्यवाद। आशीष जी दुनिया को भी हम आसानी से कहाँ समझ पा रहे हैं।

navneet sharma said...

arun bhai bade dinon k baad aaapko dekha. bahut achcha laga. blog bhi sunder hai.

navneet sharma