सबका अपना-अपना मठ है
मेरे मठ में मेरा हठ है
मैं, मैं, मैं, मैं मंत्र हमारा
मैं की खातिर तंत्र हमारा
मेरा मैं है मुझको प्यारा
मैं अपने ही मैं से हारा
मेरे मैं की जय है, जय है
मेरा मैं ही मेरा भय है
मेरे मैं को आबाद करो
मुझको मैं से आजाद करो
मैं साधू , मेरा मैं शठ है
फ़िर भी मैं की खातिर हठ है।
- अरुण आदित्य

